Story Chor ka Chara

Story Chor ka Chara | चोर का चारा

Story Chor ka Chara एक व्यंगात्मक कहानी है‚ जो एक जाने माने व्यंग लेखक सी०भास्कर राव ( C. Bhaskar Rao ) द्वारा लिखित संग्रहों में से एक है। जिसे पढ़कर आपको बहुत ही आनन्द आयेगा। यदि यह व्यंगात्मक कहानी  आपको पसन्द आती है तो इसे अपने Friends, Relatives आदि के साथ साझा करना बिल्कुल भी न भूलें।

Story Chor ka Chara

मुझे पता चला कि अंतरिक्ष की सैर करके बंदर वापिस लौट गए हैं। मैंने एक News Reporter की हैसियत से इसे अपनी जिम्मेदारी माना कि उनसे मिलूं। उन्हें बधाई दूं और अंतरिक्ष यात्रा के संबंध में उनके अनुभव पूछूं। ताज्जुब की बात है कि जब मनुष्य अंतरिक्ष की यात्रा करके लौटते हैं तो उनकी तस्वीरें छपती हैं और साक्षात्कार प्रकाशित होते हैं, पर पहली बार बंदर आकाश का विचरण कर आए, पर किसी ने उन पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। मैं चूंकि हमेशा से यह मानता रहा हूं कि मनुष्य की मूल उत्पत्ति बंदरों से हुई है और आज भी बंदर मनुष्यों से कहीं अधिक श्रेष्ठ हैं, इसलिए उनकी उपेक्षा मुझसे सही नहीं गयी और में उन बंदरों से मिलने के लिए अमेरिका चल पड़ा मिलने जाते समय मन में बड़ा भक्ति भाव था कि अपने पूर्वजों से मिलने जा रहा हूं।

उन अंतरिक्ष यात्री बंदरों को जिस फाइव स्टार होटल में रखा गया था, वहां पहुंचने पर पता चला कि उनमें से एक बंदर की मृत्यु हो गयी है। एक ही बचा है। मैंने उससे मिलना चाहा, पर उसकी पहरेदारी पर तैनात मनुष्य ने मुझे मिलने नहीं दिया और कहा कि इन दिनों बंदर, बीमार भी है और बिज़ी भी विदेशों में पशुओं की भी इतनी प्रतिष्ठा है कि उनके पहरे पर मनुष्य तैनात रहते हैं, जबकि हमारे देश में मनुष्यों की पहरेदारी में ही पशुओं की उम्र गुज़र जाती है। मैंने उससे कहा कि मैं बहुत दूर देश से आया हूं और मेरा मिलना जरूरी है ताकि हमारे देश के लोग भी इस बंदर के अंतरिक्ष अनुभव से लाभ उठाएं, उनका ज्ञान बढ़े। इस पर उस व्यक्ति ने मेरा विजिटिंग कार्ड मांगा।

इसे भी पढ़ेंः– Father Quotes in Hindi

उसे भीतर बंदर

के पास ले गया और उल्टे पांव लौट आया, कहा- बंदर ने तुमसे मिलने से एकदम ही मना कर दिया है।’ मैंने पूछा-भई, ऐसी क्या बात हो गयी आखिर? वह बंदर मीडिया से तो मिल ही रहा है। मैंने क्या कसूर किया है। उस व्यक्ति ने बताया- ‘तुम्हारा कसूर यह है कि तुम भारत से आए हो कार्ड पर इस देश का नाम देखते ही बंदर चीखने-चिल्लाने लगा कि वह किसी भारतीय से नहीं मिलना चाहता है। मेरी समझ में नहीं आया कि उस अमरीकी बंदर को भारतीय मनुष्य से इतनी एलर्जी क्यों है।

विदेशी मानव भारतीयों को ओछी नजरों से देखते हैं, यह अहसास तो था, लेकिन वहां के पशु भी हमसे इतनी नफरत करते हैं, यह मैं नहीं जानता था मन में सोचा कि है तो आखिर अमरीकी बंदर, भारतीयों को क्यों घास डालेगा। मैंने उस व्यक्ति को बहुत समझाया उससे दोस्ती गांठी बातों ही बातों में मुझे पता चला कि वह बेहद चटोरा है और चटपटा भारतीय भोजन बहुत पसंद करता है। मैंने अचार, मसाले के डिब्बे बतौर घूस दिए। अर्थात् उसे खुश करने और उससे अपना काम निकालने के लिए प्रचलित भारतीय शैली अपनायी।

Read This– पीएम किसान FPO योजना 2022

वह नरम हुआ

और यह कहता हुआ भीतर गया कि किसी तरह उस बंदर को साक्षात्कार के लिए तैयार करने की कोशिश करेगा। इस बार वह कुछ देर से लौटा, पर यह सुखद सूचना लेकर आया कि बड़ी मुश्किल से केवल पांच-सात मिनट के लिए बंदर मिलने को तैयार हुआ है। मुझे दिली खुशी हुई कि भारतीय घूसखोरी अमेरिका में भी कामयाब रही। उस व्यक्ति ने कहा कि मिलने से पूर्व बंदर की शर्त यह है कि मैं Detol पानी में अच्छी तरह नहा-धोकर ही भीतर जाऊं शर्त सुनकर मैं हैरान रह गया, फिर भी मिलना जरूरी था, इसलिए शर्त मान ली।

भीतर जाकर मैंने देखा कि वह बंदर एक शानदार Air condition कमरे में, आरामदेह सोफे पर पसरा हुआ है। मैंने उसे नमस्कार किया। जवाब देने की बजाय उसने नाक-भौं सिकोड़े। मुझे अपने से काफी दूर एक कुर्सी पर बैठने का इशारा किया, मानो नहा-धो लेने के बावजूद मैं कीटाणुमुक्त न हुआ होऊं। उसने मैं रुखाई से पूछा- कैसे आना हुआ। मैंने विनम्रता से कहा- ‘बस आपके दर्शन करने आ गया हूं। आपको बधाई देने और अंतरिक्ष के संबंध में आपके अनुभव जानने।’

वह बोला- ‘ठीक है, दर्शन तुमने कर लिए बधाई मैंने ले ली अब तुम जा सकते हो। मैं किसी भारतीय से मिलना पसंद नहीं करता हूं। उसने अपने कंधे उचकाकर, अमरीकी अंदाज़ में कहा। मैंने पूछा- ‘आखिर इसकी वजह क्या है?’ मेरा प्रश्न सुनकर वह उखड़ गया और कहा- पूरा भारत भ्रष्ट हो चुका है। भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। किसी भारतीय से मिलने का मतलब है, भ्रष्टाचार से मिलना।”

इसे भी पढ़ेंः– Truth of Life Quotes in Hindi

मैं बंदर की यह बात सुनकर

ज़रा भी विचलित नहीं हुआ। कोई हमें भ्रष्टाचारी कहता है, तो हमें कोई तकलीफ नहीं होती है। भ्रष्टाचार हमारी जीवन शैली है। फिर बुरा क्या मानना प्रतिक्रिया क्यों जाहिर करना। बल्कि मुझे यह लगा कि हमारे भ्रष्टाचार के संबंध में शायद उसकी जानकारी ज़रा सीमित है, इसीलिए मैंने उसे समझाया- सारी दुनिया के मानव जगत् में ही नहीं, वरन् पशु जगत् में भी चिंता का विषय यह है कि भारतीय भ्रष्टाचार से कैसे बचें। हमारा भ्रष्टाचार देश से लेकर विदेश तक किसी वायरल इंफैक्शन की तरह फैल रहा है। जो एक बार इसकी लपेट-चपेट में आ जाता है, वह फिर जीवन भर इसके बिना जी नहीं पाता है।

दरअसल हमारे देश में भ्रष्टाचार हवा और पानी से अधिक हो गया है, इसलिए वह देश की सीमाएं लांघकर सारी दुनिया में फैल रहा है। आप चाहें तो हमें भ्रष्टाचारी कह लें या घोटालेबाज, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह सारे संबोधन भारतीयता की हमारी व्यापक परिभाषा में आसानी से समा जाते हैं। अपने भ्रष्टाचार की मेरी यह व्याख्या सुनकर बंदर बड़ा खुश हुआ। उसने सोचा होगा कि मैं उसकी बात का विरोध करूंगा। जबकि विरोध का प्रश्न ही नहीं उठता है।

कोई हमें भारतीय कह ले या भ्रष्टाचारी, हमारे लिए दोनों के अर्थ बराबर हो चुके हैं खुश होकर बंदर ने कहा-“खैर, यह बताओ कि तुम मेरी अंतरिक्ष यात्रा के किस पक्ष के बारे में जानना चाहते हो, क्योंकि यात्रा हमारी काफी लम्बी रही और हमने पूरे ब्रह्मांड का भ्रमण किया है। इस पर मैं बोला-‘जब आपने इतना भ्रमण किया है तो जाहिर है कि आप हमारे देश पर से भी गुज़रे ही होंगे। उसी के संबंध में अपना अनुभव सुनाइए।’

इसे भी पढ़ेंः–Love Shayari In Hindi

बंदर ने तपाक से कहा-

‘सबसे खराब अनुभव तो तभी हुआ जब हमारा यान तुम्हारे देश पर से गुज़र रहा था। इसलिए कि नीचे से बदबू का बगूला उठकर आकाश में फैल रहा था और हमारी नाक सड़ रही थी। वह बदबू जितनी मानव मल की थी उससे कहीं अधिक घूसखोरी, भ्रष्टाचार और घोटालों की थी। घोटालों की बदबू सबसे तेज़ थी और वह भी तभी ज्यादा तीव्र महसूस होती थी, जब हम तुम्हारे देश की राजधानियों से होकर गुज़रते थे।”

मैंने बात बदलने के लिए पूछा-‘इससे भिन्न कोई अनुभव?” तब बंदर ने बताया- ‘हां, एक मजेदार बात देखी कि दो चोर आपस में बुरी तरह लड़ रहे थे। दोनों एक दूसरे को इतनी भद्दी और गंदी गालियां दे रहे थे कि हमें लगा जैसे कोई हमारे कानों में सीसा घोल रहा है। पता चला कि वे इसलिए लड़ रहे थे कि सिद्धांततः वे एक दूसरे के खिलाफ थे। न उनके झंडे मिलते थे, न नारे, न मुद्दे एक दिलचस्प बात यह भी मालूम हुई कि इस सारे विरोध के बावजूद वे पहले भी एकाध बार दोस्त बन गए थे और मिल-जुल कर चोरी करते थे, तथा हाथ लगा माल मिल बांट लेते थे। पर यह दोस्ती ज़्यादा दिनों तक चली नहीं। बंटवारे को लेकर झगड़े बढ़ने लगे और फिर से वे एक-दूसरे के दुश्मन बन गए।

दोस्ती तभी तक बरकरार रही,

जब तक दोनों के साझा स्वार्थ सघते रहे। जहां उनके स्वार्थ टकराने लगे, वे भी मुद्दों के नाम पर लड़ने-भिड़ने लगे। उन्हें लड़ाने में वहां के शासक की भूमिका काफी असरदार थी। वह दोनों को एक दूसरे के खिलाफ उकसा देता था ताकि उसकी कुर्सी सलामत रहे। जब यह बात दोनों दोस्तों की दुश्मनों की समझ में आ गयी, तो उन्होंने सोचा कि शासक के खिलाफ जेहाद बोल दिया जाय। इस मामले में दोनों मिल गए। शायद इसी को हिन्दी में कहते हैं, चोर-चोर मौसेरे भाई शासक की कुर्सी डोलने लगी। उसने उनके सामने चारा डाल दिया।

उनके लिए दोस्ती या दुश्मनी से अधिक महत्त्वपूर्ण यह चारा था, इसलिए उन्होंने आपस में तय किया कि छह महीने मैं खाऊंगा, तुम सो जाओ। फिर छह महीने तुम खाना, में सो जाऊंगा। फिलहाल एक चारा खा रहा है और दूसरा झपकियां लेते हुए भी, ताक-झांक में लगा हुआ है कि कहीं पहला छह ही महीने में पूरा चारा चट न कर जाय। मैंने पूछा- यह हमारे देश के किस हिस्से की कथा है? क्योंकि यह तो पंचतंत्र की-सी कहानी लग रही है। इस पर बंदर ने हंस कर कहा- ‘जिस प्रदेश में गंगा बहती है।’

मैंने अंतिम सवाल किया-

यह बताइए कि आपके सहयोगी बंदर की मौत कैसे हो गयी? इस पर उसने झल्लाकर कहा- ‘इसके लिए भी तुम्हारा देश ही जिम्मेदार है। जब हम तुम्हारे देश की राजधानी से गुज़र रहे थे, तब दो बुल्डॉग एक हड्डी के लिए एक दूसरे पर इतना भौंक रहे थे कि मेरे सहकर्मी को हृदयाघात लगा और यहां पहुंचने तक वह बेचारा परलोक सिधार गया।”

Read ThisOrganic Farming Scheme in Hindi | जैविक खेती योजना

आपका सहयोग- 

दोस्‍तों मुझे उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल Story Chor ka Chara  जरूर पसंद आया होगा. यदि आपको यह संग्रह पसंद आया है तो कृपया व्यंगात्मक कहानियों  से सम्बंधित इस पोस्ट को अपने मित्र और परिवारजनों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करे.

हमें आशा है कि ये Chor ka Chara से सम्बंधित हमारा पोस्ट आपको पसन्‍द आये होगें. इसके अलावा अगर आपने अभी तक हमें सोशल मीडिया जैसे instagram और facebook पर फॉलो नहीं किया है तो जल्द ही कर लीजिये.

Leave a Reply

Your email address will not be published.