Gautam Buddha Stories in Hindi ! गौतम बुद्ध की कहानियाँ

Gautam Buddha Stories in Hindi के इस आर्टिकल में हम आपके लिये भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी कुछ प्रेरणादायक कहानियों का संग्रह लेकर आये हैं। सत्य, शांति और ज्ञान की प्राप्ति करने वाले गौतम बुद्ध की कहानियाँ हमारे जीवन के लिए प्रेरणा की स्रोत हैं | हम भगवान बुद्ध के बताए हुए मार्गों पर चलकर अपने जीवन को खुशियों से भर सकते हैं |

भगवान बुद्ध की कहानी  – नदी का जल

यह कहानी एक नदी के छोर पर रहने वाले कुछ लोगों की है‚ जिनमें किसी कारणवश आपस में मनमुटाव हो गया है।

एक छोटी सी नदी किनारों पर लोग रहते थे। नदी के पानी का उपयोग दोनों ओर के लोग अपने–अपने कार्यों के लिये करते थे और अपना खुशहाल जीवन व्यतीत करते थे।

एक बार किसी कारणवश पानी को लेकर दोनों पक्षों के लोगों में झगड़ा हो गया। वे एक-दूसरे पर ज्यादा पानी इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे थे। जब आपस में बातचीत से मामले का हल नहीं निकला तो वे मरने–मारने को भी तैयार हो गये। उनके पास जो भी हथियार थे, उन्हें तत्काल निकाल लाए और एक–दूसरे पर हमला करने को तैयार हो गये थे, तभी किसी व्यक्ति ने जाकर भगवान् बुद्ध को सूचना दी।

उन्होंने दोनों पक्षों के लोगों को बुलाया और उनके झगड़े का कारण पूछा। दोनों पक्षों के लाेगों ने अपनी–अपनी बात भगवान बुद्ध के सामने रखी। बुद्ध ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और मुस्कुरा कर कहा कि यदि दूसरे पक्ष ने तुम्हारी बात नहीं मानी तो तुम लोग क्या करोगे ? दोनों प्रतिनिधियों ने गुस्से में कहा कि हम खून की नदियाँ बहा देंगें। भगवान बुद्ध ने कहा कि

इसका अर्थ है कि तो तुम्हें खून चाहिए।

यह बात सुनकर हैरानी से हतप्रभ होकर बुद्ध की ओर देखा फिर कहा कि ʺनहींʺ हमें सिर्फ पानी चाहिए।

तब सहज भाव से बुद्ध ने कहा कि खून बहाकर तो खून ही मिलेगा, पानी कैसे मिलेगा ?

कुछ देर रुककर बुद्ध फिर बोले कि याद रखो हिंसा सिर्फ हिंसा को बढ़ाती है। बैर, बैर को बढ़ाता है। बहने वाली उस नदी से हीं सीख लो कि वह किसी से लड़ती नहीं‚ निश्छल भाव से अपने सभी मानवों को अपने जल का दान करती है।

बुद्ध के शब्दों ने जादू जैसा काम किया और दोनों पक्षों की समस्या का सहज रूप से समाधान हो गया। दोनों पक्ष मिल-बाँटकर पानी का उपयोग करने लगे।

भगवान बुद्ध की इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हिंसा, हिंसा को बढ़ाती है। बैर, बैर को बढ़ाता है।

भगवान बुद्ध की कहानी  –अमरत्व का फल

एक दिन एक किसान भगवान बुद्ध के पास आया और उनसे सम्मुख अपनी बात रखते हुये बोला– ʺहे महाराज ! मैं एक साधारण किसान हूँ। अपने खेत में बीज बोकर, हल चला कर अनाज उत्पन्न करता हूँ और तब उसे ग्रहण करता हूँ किंतु इससे मेरे मन को तसल्ली प्राप्त नहीं होती।ʺ

इसके लिये आप मुझे मार्गदर्शन दीजिए- मैं कुछ ऐसा करना चाहता हूँ, जिससे मेरे खेत में

अमरत्व के फल उत्पन्न होने लगें।

किसान की ऐसी बात सुनकर भगवान बुद्ध मुस्कराते हुये बोले– ʺहे भले व्यक्ति ! तुम्हें अमरत्व का फल तो अवश्य मिल सकता है किन्तु इसके लिए तुम्हें खेत में बीज न बोकर अपने मन में बीज बोने होंगे।ʺ

Lord Buddha कि ऐसी बात सुनकर किसान हैरानी से बोला – प्रभु ! आप यह क्या कह रहे हैं ? भला मन के बीज बोकर भी कभी फल प्राप्त हो सकते हैं ?

बुद्ध बोले – बिल्कुल प्राप्त हो सकते हैं और इन बीजों से तुम्हें जो फल प्राप्त होंगे। वे साधारण न होकर अद्भुत होंगे, जो तुम्हारे जीवन को भी सफल बनाएंगे और तुम्हें जीवन की एक नयी राह दिखायेंगे।

किसान ने कहा , ‘प्रभु, तब तो मुझे अवश्य बताइए कि मैं किस प्रकार से मन में बीज बोऊँ ? बुद्ध बोले – तुम मन में विश्वास के बीज बो लो, विवेक का हल चलाओ, ज्ञान के जल से उसे सींचो और उसमें नम्रता की खाद डालो।

इससे तुम्हें अमरत्व का फल प्राप्त होगा। उसे खाकर तुम्हारे सारे दु:ख दूर हो जाएँगे और तुम्हें असीम शांति का अनुभव होगा।

बुद्ध से अमरत्व के फल की प्राप्ति की बात सुनकर किसान की आँखें खुल गयीं। वह समझ गया कि अमरत्व का फल अच्छे विचारों के द्वारा हीं प्राप्त किया जा सकता है।

भगवान बुद्ध की इस कहानी से हमें सीख मिलती है किअमरत्व का फल आपके मन के अच्छे विचारों के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।

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